उत्तराखंड में दीपावली के अवसर पर मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है, जिसमें गन्ने से बनी मूर्ति का विशेष महत्व है। जानिए इस अनूठी परंपरा के पीछे की मान्यताएं।
उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में दीपावली के दौरान मां लक्ष्मी की पूजा का एक अनूठा तरीका प्रचलित है। यहां, मां लक्ष्मी की मूर्ति गन्ने से बनाई जाती है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और इसका स्थानीय संस्कृति में गहरा महत्व है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि गन्ना समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक है, और मां लक्ष्मी को गन्ने से बनी मूर्ति के रूप में पूजने से घर में सुख-समृद्धि आती है। गन्ने की मिठास जीवन में खुशहाली और सकारात्मकता लाने का भी प्रतीक मानी जाती है।
इस विशेष पूजा के लिए, किसान अपने खेतों से ताजे गन्ने लाते हैं और उन्हें साफ करके मां लक्ष्मी की मूर्ति का आकार देते हैं। मूर्ति को फूलों, पत्तियों और अन्य प्राकृतिक वस्तुओं से सजाया जाता है। दीपावली की रात, इस मूर्ति की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और पारंपरिक भजन गाए जाते हैं।
पूजा के बाद, गन्ने से बनी मूर्ति को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है। माना जाता है कि इस प्रसाद को खाने से घर में धन और समृद्धि बनी रहती है। यह परंपरा न केवल धार्मिक महत्व रखती है, बल्कि यह कृषि और प्रकृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है।
उत्तराखंड की यह अनूठी परंपरा दीपावली के त्योहार को और भी खास बनाती है और स्थानीय लोगों के जीवन में खुशियां लाती है। यह परंपरा हमें यह भी सिखाती है कि प्रकृति में मौजूद वस्तुओं का उपयोग करके भी हम ईश्वर की आराधना कर सकते हैं।
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