उत्तराखंड के 9 जिलों में किसी भी सांसद या विधायक के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। वहीं, मुख्यमंत्री से ज्यादा अमीर उनके कैबिनेट मंत्री हैं, जिनकी संपत्ति 87 करोड़ से अधिक है।
मुख्य बिंदु
Toggleउत्तराखंड राज्य की राजनीतिक स्थिति कई अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर है, क्योंकि यहाँ 13 में से 9 जिलों में किसी भी सांसद (MP) या विधायक (MLA) के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। ये जिले हैं: अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, हरिद्वार, पौड़ी गढ़वाल, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल और उत्तरकाशी। यह डेटा उत्तराखंड उच्च न्यायालय (Uttarakhand High Court) की वेबसाइट से 25 अक्टूबर, 2024 तक लिया गया है।
हालांकि, 4 जिले – देहरादून, नैनीताल, पिथौरागढ़ और उधमसिंह नगर – ऐसे हैं जहाँ अभी भी जनप्रतिनिधियों के खिलाफ मामले लंबित हैं। उधमसिंह नगर में सबसे ज्यादा 6 मामले लंबित हैं। इन जिलों में लंबित मामलों का विवरण इस प्रकार है:
- देहरादून: 4 मामले (आर.के. चमोली, उमेश कुमार शर्मा, प्रीतम सिंह, महेश नेगी)
- नैनीताल: 5 मामले (राम सिंह कैड़ा (2), मोहन सिंह बिष्ट(2), रंजीत रावत)
- पिथौरागढ़: 1 मामला (हरीश धामी)
- उधमसिंह नगर: 6 मामले (शिव कुमार अरोड़ा(3), आदेश सिंह चौहान(3))
पार्टीवार विश्लेषण
जिन व्यक्तियों के खिलाफ मामले लंबित हैं, उनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress) के चार-चार नेता शामिल हैं। भाजपा के राम सिंह कैड़ा, मोहन सिंह बिष्ट, शिव कुमार अरोड़ा और महेश सिंह नेगी शामिल हैं, जबकि कांग्रेस के प्रीतम सिंह, हरीश धामी, आदेश सिंह और रणजीत सिंह शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, हरिद्वार की खानपुर सीट से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार शर्मा पर भी एक मामला लंबित है।
मुख्यमंत्री से अधिक अमीर मंत्री
एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से अधिक अमीर उनके कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज हैं। सतपाल महाराज, जिनकी संपत्ति 87 करोड़ रुपये से अधिक है, देश के सबसे अमीर मंत्रियों में 39वें स्थान पर हैं।
MP/MLA कोर्ट क्या है?
सांसदों और विधायकों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए MP/MLA कोर्ट की स्थापना 2003 में की गई थी। यदि किसी सांसद या विधायक को किसी आपराधिक मामले में 2 साल या उससे अधिक की सजा होती है, तो उसकी सदस्यता तुरंत समाप्त हो जाती है। हालाँकि, उत्तराखंड में अभी तक किसी भी विधायक या सांसद की सदस्यता रद्द नहीं हुई है।
राजनीतिक और कानूनी मामलों में, त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल न्याय तेजी से मिलता है, बल्कि यह भी सुनिश्चित होता है कि जनप्रतिनिधि कानून के दायरे में रहें।
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