पौड़ी गढ़वाल में अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे दो युवकों पर भालू ने हमला कर दिया, जिससे ग्रामीण भयभीत हैं। वन विभाग ने गश्त बढ़ाई और मुआवजा देने की घोषणा की है।
उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में एक अप्रत्याशित घटना में, अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे दो युवकों पर एक भालू ने हमला कर दिया। यह घटना खिर्सू क्षेत्र के माथीगांव और कठूली गांव के पास हुई, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई है।
घटना का विवरण
आदर्श (विक्रम सिंह के पुत्र) और आकाश सिंह (भागेश सिंह के पुत्र) नामक दो युवक, जो अग्निवीर भर्ती के लिए शारीरिक प्रशिक्षण कर रहे थे, सुबह लगभग छह बजे कसरत के लिए निकले थे। जब वे विजेंद्र सिंह के घर के सामने से गुजर रहे थे, तो अचानक एक जंगली भालू झाड़ियों से निकला और उन पर हमला कर दिया।
घायलों की स्थिति
भालू के हमले में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और भालू को भगाया। घायल युवकों को तत्काल श्रीनगर के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई है।
ग्रामीणों में आक्रोश
इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भय और आक्रोश का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधियों पर नियंत्रण किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। उनका कहना है कि पिछले कुछ महीनों से क्षेत्र में भालू, गुलदार और अन्य जंगली जानवरों की गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं, जिससे लोगों की जान को खतरा है।
वन विभाग की प्रतिक्रिया
घटना की जानकारी मिलने पर वन विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में गश्त बढ़ा दी है। पौड़ी रेंज नागदेव के वन दरोगा जगदीश नेगी ने बताया कि घटना की प्राथमिक जानकारी उच्चाधिकारियों को भेज दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि घायलों को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुआवजा प्रदान किया जाएगा।
अग्निवीर योजना
अग्निवीर योजना भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक सैन्य भर्ती योजना है। इस योजना के तहत, युवाओं को चार साल के लिए भारतीय सेना में सेवा करने का अवसर मिलता है। अग्निवीर बनने के लिए युवाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार रहना होता है।
उत्तराखंड में वन्यजीव संघर्ष
उत्तराखंड में वन्यजीव संघर्ष एक गंभीर समस्या है। राज्य में बड़ी संख्या में जंगली जानवर पाए जाते हैं, जो अक्सर मानव बस्तियों में घुस जाते हैं और लोगों पर हमला कर देते हैं। वन्यजीवों के हमलों से लोगों की जान और माल का नुकसान होता है।
वन्यजीव संघर्ष को कम करने के उपाय
वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- वन्यजीवों के आवासों का संरक्षण
- मानव बस्तियों के आसपास बाड़ लगाना
- लोगों को वन्यजीवों के बारे में जागरूक करना
- वन्यजीवों के हमलों की स्थिति में लोगों को मुआवजा देना
अतिरिक्त जानकारी
- उत्तराखंड में लगभग 1,500 भालू हैं।
- राज्य सरकार ने वन्यजीव हमलों में मारे गए लोगों के परिजनों को ₹4 लाख का मुआवजा देने का प्रावधान किया है।
- उत्तराखंड में वन्यजीव संरक्षण के लिए कई गैर-सरकारी संगठन भी काम कर रहे हैं।
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