इंदौर में स्वामी विवेकानंद की 52 फीट ऊंची पंच धातु से बनी प्रतिमा स्थापित की जाएगी। मूर्तिकार का दावा है कि यह प्रतिमा हजारों साल तक सुरक्षित रहेगी और दर्शकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।
इंदौर शहर में जल्द ही स्वामी विवेकानंद की 52 फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जो शहर की नई पहचान बनेगी। यह प्रतिमा पंच धातु से बनी होगी और इसे सिरपुर स्थित देवी अहिल्या सरोवर उद्यान में स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना पर कुल 4 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
प्रतिमा की विशेषताएँ
यह प्रतिमा 52 फीट ऊंची होगी और इसे पंच धातु से बनाया जाएगा। मूर्तिकार नरेश कुमावत के अनुसार, इस प्रतिमा में 85 प्रतिशत कॉपर और शेष 15 प्रतिशत में जिंक, लेड आदि धातुएं होंगी। कॉपर की वजह से इसकी आयु हजारों साल होगी। प्रतिमा का वजन 14 टन होगा।
मूर्तिकार का दावा
मूर्तिकार नरेश कुमावत का दावा है कि स्वामी विवेकानंद की इतनी ऊंची यह विश्व में अनूठी प्रतिमा होगी। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रतिमा हर मौसम का सामना करने में सक्षम है।
प्रतिमा स्थल पर गैलरी
प्रतिमा स्थल पर एक विशेष गैलरी भी बनेगी। इस गैलरी में स्वामी विवेकानंद के जीवन और विचारों को चित्र, दस्तावेज और डिजिटल माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा।
शिकागो भाषण से प्रेरित
इंदौर में लगाई जाने वाली प्रतिमा वही है, जिसकी तस्वीर शिकागो में खींची गई थी। शिकागो में स्वामी विवेकानंद ने 11 सितंबर 1893 को ऐतिहासिक भाषण दिया था।
मूर्तिकार नरेश कुमावत
अंतर्राष्ट्रीय मूर्तिकार नरेश कुमार कुमावत हरियाणा के गुरुग्राम में मूर्तियां तैयार करते हैं। उन्होंने 80 देशों में 600 से ज्यादा मूर्तियां बनाई हैं। आंध्र प्रदेश में 206 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ संसद भवन में लगी डॉ. बीआर अंबेडकर और सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमाएं भी कुमावत ने बनाई हैं।
अन्य प्रतिमाएँ
इंदौर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा भी लगाई जाएगी। यह प्रतिमा सुदामा नगर कॉरिडोर में स्थापित होगी और इस पर 2 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
राम मंदिर की प्रतिकृति
इंदौर के विश्राम बाग में अयोध्या में बने राम मंदिर की प्रतिकृति भी बनाई जा चुकी है। इसे 21 टन लोहे के स्क्रैप से तैयार किया गया था।
सांची के स्तूप का दक्षिण द्वार
शहर में सांची के स्तूप का दक्षिण द्वार भी आयरन स्क्रैप का इस्तेमाल कर बनाया गया है। यह स्ट्रक्चर गीता भवन चौराहे पर डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पास लगाया गया है।
यह प्रतिमा न केवल इंदौर शहर के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि यह युवाओं को प्रेरित करने और स्वामी विवेकानंद के विचारों को प्रसारित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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