दिवाली के त्योहार के दौरान बाजार में नकली सौंदर्य उत्पादों की भरमार है। इन उत्पादों से त्वचा को गंभीर नुकसान हो सकता है। असली और नकली उत्पादों की पहचान करने के तरीके जानें।
दिवाली के त्योहार के दौरान बाजार में नकली सौंदर्य उत्पादों की बिक्री बढ़ जाती है। ये उत्पाद देखने में असली जैसे लगते हैं, लेकिन इनकी गुणवत्ता और सामग्री त्वचा के लिए हानिकारक हो सकती है। भोपाल में कई महिलाओं ने नकली उत्पादों का इस्तेमाल करने के बाद त्वचा पर जलन और एलर्जी की शिकायत की है।
नकली सौंदर्य उत्पादों में पारा, सीसा, आर्सेनिक और कैडमियम जैसे खतरनाक तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व त्वचा में जलन, एलर्जी, मुंहासे और एक्जिमा जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक इनका उपयोग करने से त्वचा का कैंसर होने का खतरा भी बढ़ जाता है। ये केमिकल त्वचा के पोर्स को बंद कर देते हैं, जिससे त्वचा सांस नहीं ले पाती और स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती है।
असली और नकली उत्पादों की पहचान करने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:
- पैकेजिंग: असली उत्पाद की पैकेजिंग साफ-सुथरी, चमकदार और परफेक्ट होती है, जबकि नकली उत्पादों की पैकेजिंग थोड़ी फीकी, धुंधली या गलत स्पेलिंग वाली हो सकती है।
- बारकोड और क्यूआर कोड: असली उत्पाद स्कैन करने पर आपको सीधे ब्रांड की ऑफिशियल वेबसाइट पर ले जाएगा।
- कीमत: यदि कोई ब्रांडेड उत्पाद अपनी असली कीमत से बहुत ज्यादा सस्ते दाम में मिल रहा है, तो वह नकली हो सकता है।
- खुशबू और टेक्स्चर: असली उत्पादों में हल्की और नेचुरल खुशबू होती है, जबकि नकली उत्पादों की खुशबू तेज या केमिकल जैसी होती है।
- मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट: असली उत्पाद पर बैच नंबर, मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट साफ-साफ छपी होती है।
त्वचा विशेषज्ञ डॉ. एकता साहू बताती हैं कि नकली सौंदर्य उत्पादों के इस्तेमाल से त्वचा पर गंभीर नुकसान हो सकता है। उन्होंने सलाह दी कि हमेशा विश्वसनीय स्टोर से ही सौंदर्य उत्पाद खरीदें। एम्स भोपाल के त्वचा रोग विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. मनीष खंडारे कहते हैं कि त्योहार के समय हमारी स्किन धुएं और सजावटी उत्पादों के संपर्क में आती है, जिससे एलर्जी या जलन की संभावना बढ़ जाती है। दिवाली के समय स्किन से जुड़े केस 40% बढ़ जाते हैं।
इसके अतिरिक्त, सौंदर्य उत्पादों को खरीदने से पहले उनकी सामग्री की जांच करना महत्वपूर्ण है। पैराबेन जैसे हानिकारक रसायन से बचें, जो हार्मोन को बाधित कर सकते हैं।
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