भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण को बेल्जियम कोर्ट की मंजूरी

बेल्जियम की एक अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत प्रत्यर्पित करने की मंजूरी दे दी है। चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक से ₹13,000 करोड़ के घोटाले का आरोप है।

बेल्जियम की एंटवर्प शहर की एक अदालत ने भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी है। चोकसी पर पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से लगभग ₹13,850 करोड़ (1.7 बिलियन डॉलर) की धोखाधड़ी करने का आरोप है।

अधिकारियों ने बताया कि अदालत ने माना कि भारतीय एजेंसियों के अनुरोध पर बेल्जियम पुलिस द्वारा की गई चोकसी की गिरफ्तारी वैध थी। हालांकि, चोकसी को अभी भी ऊपरी अदालत में अपील करने का अधिकार है। अगर वह अपील नहीं करता या अपील खारिज हो जाती है तो उसके भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

बेल्जियम पुलिस ने भारतीय जांच एजेंसियों के प्रत्यर्पण की अपील पर 12 अप्रैल को चोकसी को गिरफ्तार किया था। फिलहाल वह जेल में है। चोकसी 2018 में भारत से भाग गया था और तब से एंटीगुआ और बारबुडा में रह रहा था। उस पर PNB घोटाले में शामिल होने का आरोप है, जिसमें उसने और उसके भतीजे नीरव मोदी ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर धोखाधड़ी से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoUs) हासिल किए और विदेशों में धन हस्तांतरित किया।

बेल्जियम अभियोजकों ने कोर्ट को बताया कि चोकसी के अभी भी फरार होने का खतरा है, इसलिए उसे जेल से रिहा नहीं किया जा सकता।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “यह आदेश हमारे पक्ष में है। अदालत ने साफ कहा कि भारतीय अनुरोध पर बेल्जियम द्वारा की गई गिरफ्तारी कानूनी है। यह प्रत्यर्पण की दिशा में पहला बड़ा कदम है।”

बेल्जियम में अभियोजन पक्ष को भारत के विदेश मंत्रालय और CBI के अधिकारियों ने पूरी मदद की। कोर्ट में उन्होंने चोकसी के अपराधों के सबूत पेश किए और बताया कि वह अपने भतीजे नीरव मोदी के साथ मिलकर PNB बैंक से करीब ₹13,850 करोड़ की धोखाधड़ी में शामिल था।

चोकसी ने 15 नवंबर 2023 को बेल्जियम का ‘एफ रेजिडेंसी कार्ड’ हासिल किया था, जो कथित तौर पर उसकी बेल्जियन नागरिक पत्नी की मदद से प्राप्त किया गया था। रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि चोकसी ने बेल्जियम अधिकारियों को फर्जी दस्तावेज सौंपे थे। उसने अपनी भारतीय और एंटीगुआ की नागरिकता छिपाकर गलत जानकारी दी, ताकि उसे भारत न भेजा जा सके।

2018 में भारत छोड़ने से पहले ही चोकसी ने 2017 में एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता ले ली थी। चोकसी बार-बार खराब सेहत का हवाला देकर भारत में पेशी पर आने से इनकार करता रहा। कभी-कभी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ही उसकी पेशी होती थी। भारत में उसकी कई संपत्तियां भी जब्त की जा चुकी हैं।

2021 में चोकसी को डोमिनिका में गिरफ्तार किया गया था। तब जेल से उसकी ये तस्वीर सामने आई थी। जेल में चोकसी ने अपने साथ मारपीट का आरोप लगाया था।

सीबीआई की एक टीम उसका प्रत्यर्पण कराने के लिए डोमिनिका पहुंची, लेकिन इसके पहले ही ब्रिटिश क्वीन की प्रिवी काउंसिल से उसे राहत मिल गई। बाद में उसे फिर एंटीगुआ के हवाले कर दिया गया। हालांकि, डोमिनिका की जेल में मेहुल चोकसी को 51 दिन गुजारने पड़े थे। यहां उसने दलील दी थी कि वो एंटीगुआ जाकर वहां के एक न्यूरोलॉजिस्ट से ट्रीटमेंट कराना चाहता है। एंटीगा पहुंचने के कुछ दिन बाद डोमिनिका की अदालत ने चोकसी के खिलाफ दर्ज केस भी खारिज कर दिए।

मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण भारत के लिए एक बड़ी सफलता होगी, जो भगोड़े आर्थिक अपराधियों को वापस लाने और उन्हें न्याय के कटघरे में खड़ा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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