सेवानिवृत्त शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा के साथ बेरोजगार संघ के मंच पर हुए अपमानजनक व्यवहार पर सोशल मीडिया पर आक्रोश फैल गया है। जानिए क्या है पूरा मामला।
मुख्य बिंदु
Toggleउत्तरा पंत बहुगुणा का बेरोजगार संघ के मंच पर अपमान, सोशल मीडिया पर आक्रोश
उत्तराखंड की जानी-मानी सेवानिवृत्त शिक्षिका उत्तरा पंत बहुगुणा, जो अपनी स्पष्टवादिता के लिए प्रसिद्ध हैं, हाल ही में बेरोजगार युवाओं के एक आंदोलन में समर्थन देने पहुंचीं। लेकिन, वहां उनके साथ हुए अपमानजनक व्यवहार ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना को लेकर उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
उत्तरा पंत बहुगुणा: एक परिचय
उत्तरा पंत बहुगुणा एक सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं, जो अपने बेबाक स्वभाव और सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने के लिए जानी जाती हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के कार्यकाल में जनता दरबार में अपनी ट्रांसफर की मांग को लेकर सुर्खियों में आई थीं। उन्होंने शिक्षकों के अधिकारों के लिए भी सक्रिय रूप से लड़ाई लड़ी है।
मंच से शिक्षकों पर आपत्तिजनक टिप्पणी
उत्तरा पंत बहुगुणा का आरोप है कि आंदोलन के मंच से एक युवती ने शिक्षकों के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि युवती पेपर लीक के मुद्दे से भटककर धार्मिक और राजनीतिक बयानबाजी करने लगी और फिर शिक्षकों को ‘धोने’ की बात कहकर मर्यादा की सीमाएं लांघ गई।
उत्तरा पंत बहुगुणा की प्रतिक्रिया
उत्तरा पंत बहुगुणा ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘मैं वहीं मौजूद थी। चाहती तो मंच पर जाकर दो थप्पड़ जड़ देती, लेकिन आंदोलन में संघर्ष कर रहे सैकड़ों बच्चों की तपस्या को देखते हुए चुप रह गई।’ उन्होंने कहा कि युवाओं के सच्चे संघर्ष और भविष्य की चिंता को देखते हुए उन्होंने अपमान का घूंट पीकर शांत रहना उचित समझा, लेकिन अब वह मानहानि का केस दर्ज कराने की तैयारी कर रही हैं।
उन्होंने मंच पर कविता पढ़ने वाली युवती की शैक्षणिक योग्यता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘यदि शिक्षक कुछ नहीं सिखाता, तो तू कविता कैसे लिख पाई? तुझे लिखना-पढ़ना किसने सिखाया?’ उन्होंने युवती पर फर्जी डिग्री रखने का आरोप लगाया और राज्य सरकार से दोनों की शैक्षणिक जांच कराने की मांग की है।
भूख हड़ताल की चेतावनी
उत्तरा पंत बहुगुणा ने उत्तराखंड सरकार से अपील की है कि वह उस युवती की शैक्षणिक योग्यता की जांच कराए, अन्यथा वह भूख हड़ताल पर बैठेंगी। उन्होंने कहा कि उनके साथ जो मानसिक, सामाजिक और आर्थिक स्तर पर अन्याय हुआ है, उसके लिए अब विधिक रास्ता ही अंतिम विकल्प है।
विश्लेषण
इस घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड में शिक्षकों की भूमिका और सम्मान को लेकर बहस छेड़ दी है। उत्तरा पंत बहुगुणा का अपमान केवल व्यक्तिगत मामला नहीं है, बल्कि यह शिक्षकों और शैक्षणिक गरिमा के खिलाफ एक गंभीर संकेत है। अब देखना होगा कि सरकार इस विवाद पर क्या रुख अपनाती है और क्या मंच से हुई बयानबाजी पर कोई जवाबदेही तय की जाती है या नहीं।
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