देहरादून में आपदा के कारण गर्भवती महिलाओं के लिए हालात गंभीर हैं। सड़कें टूटने से अस्पताल पहुंचना मुश्किल हो गया है, जिससे सुरक्षित प्रसव एक बड़ी चुनौती बन गया है।
देहरादून, उत्तराखंड में हाल ही में आई आपदा ने कई लोगों के जीवन को प्रभावित किया है, जिनमें गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। सहस्त्रधारा में बादल फटने से हुई तबाही के कारण, इन महिलाओं के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण हैं, क्योंकि उनके प्रसव का समय नजदीक आ रहा है।
आपदा का प्रभाव:
आपदा ने सड़कों को क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिससे स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। कई इलाके शहर से कट गए हैं, जिससे गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन गई है।
स्वास्थ्य विभाग की पहल:
देहरादून जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इन महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रयास कर रहे हैं। गर्भवती महिलाओं की एक सूची तैयार की गई है, जिसमें उनके नाम, पते और प्रसव की संभावित तारीख शामिल है।
सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था:
स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष टीम गठित की है जो इन महिलाओं पर लगातार निगरानी रखेगी। आवश्यकता पड़ने पर, उन्हें एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया जाएगा।
विशेषज्ञों की राय:
देहरादून के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनोज शर्मा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग आपदा प्रभावित इलाकों में गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कर रहा है।
उदाहरण:
सिल्ला सेरा की रहने वाली गर्भवती महिला पायल की डिलीवरी डेट 29 सितंबर सुनिश्चित है। उन्हें आशाओं की मदद से मसूरी के अस्पताल पहुंचाया गया।
चुनौतियाँ:
आपदा के कारण महिलाओं को सुरक्षित प्रसव कराने में कई चुनौतियाँ आ रही हैं, जैसे कि क्षतिग्रस्त सड़कें और स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाई।
निष्कर्ष:
उत्तराखंड में आपदा से प्रभावित गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना एक महत्वपूर्ण चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस दिशा में त्वरित और प्रभावी कदम उठाने की आवश्यकता है।
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