उत्तराखंड के 2 जिलों में बच्चों में ठिगनापन: NFHS रिपोर्ट चिंताजनक

NFHS रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड के चमोली और पौड़ी जिलों में बच्चों में ठिगनापन एक गंभीर समस्या है। कुपोषण और खराब खानपान इसके मुख्य कारण हैं।

देहरादून, हाल ही में जारी राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) की रिपोर्ट ने उत्तराखंड के चमोली और पौड़ी जिलों में बच्चों में ठिगनेपन की समस्या पर चिंता व्यक्त की है। रिपोर्ट के अनुसार, इन जिलों में 5 साल तक की उम्र के बच्चों में ठिगनापन बढ़ रहा है, जो कि एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है।

रिपोर्ट का विवरण:

NFHS सर्वेक्षण में पाया गया है कि उत्तराखंड में बच्चों में ठिगनेपन में कमी आई है, लेकिन चमोली और पौड़ी जिलों में स्थिति चिंताजनक है। पौड़ी जिले में बच्चों में ठिगनापन 7.1 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि चमोली में 0.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

ठिगनेपन के कारण:

बच्चों में ठिगनेपन का मुख्य कारण कुपोषण है, जो कि खराब खानपान और पोषक तत्वों की कमी से होता है। आयरन, विटामिन डी और आयोडीन की कमी भी बच्चों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है।

डॉक्टरों की सलाह:

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि बच्चों की लंबाई और वजन से उनके शारीरिक विकास का पता चलता है। उन्होंने कहा कि बच्चों के विकास के लिए संतुलित आहार और नियमित स्वास्थ्य जांच आवश्यक है।

सरकारी योजनाएँ:

सरकार बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए विभिन्न योजनाएँ चला रही है, जिनमें आंचल अमृत योजना, बाल पलाश योजना, महालक्ष्मी किट योजना, मुख्यमंत्री दाल पोषित योजना और आंगनवाड़ी में राशन वितरण शामिल हैं।

माता-पिता की भूमिका:

माता-पिता को अपने बच्चों के शारीरिक विकास पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें संतुलित आहार देना चाहिए। बच्चों को आउटडोर गेम्स और व्यायाम में भी शामिल करना चाहिए।

जांच और उपचार:

अगर ठिगनेपन के लक्षण दिखाई देते हैं, तो थायरॉइड, विटामिन डी और आयरन की जांच करवानी चाहिए। एक अच्छे बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना भी जरूरी है।

निष्कर्ष:

उत्तराखंड के चमोली और पौड़ी जिलों में बच्चों में ठिगनापन एक गंभीर समस्या है। सरकार, डॉक्टरों और माता-पिता को मिलकर इस समस्या का समाधान करना चाहिए और बच्चों के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करना चाहिए।

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