हल्द्वानी: मोबाइल की लत से बच्चों के दिमाग पर असर, हर हफ्ते अस्पताल पहुंच रहे बच्चे

हल्द्वानी में बच्चों में मोबाइल की लत बढ़ती जा रही है, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। डॉक्टर ने बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की सलाह दी है।

हल्द्वानी में बच्चों में मोबाइल फोन और रीलों की लत तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण उनके मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। सुशीला तिवारी हॉस्पिटल (एसटीएच) के मनोचिकित्सक डॉक्टर युवराज पंत के अनुसार, हर हफ्ते 4 से 5 बच्चे मोबाइल की लत, फोकस की कमी और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याओं के साथ अस्पताल पहुंच रहे हैं।

मोबाइल की लत के प्रभाव
डॉक्टर पंत का कहना है कि रील और शॉर्ट वीडियो की लत बच्चों के मस्तिष्क को लगातार बदलती तस्वीरों का आदी बना रही है, जिससे वे किसी एक काम पर लंबे समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा, इससे उनकी याददाश्त पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

डॉक्टर की चेतावनी
डॉक्टर पंत ने अभिभावकों को चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया जानकारी का एक बड़ा माध्यम है, लेकिन अत्यधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल की लत बच्चों को अकेलापन और पारिवारिक दूरी की ओर धकेल रही है। बच्चे और किशोर अब परिवार के बजाय स्क्रीन से जुड़ना पसंद कर रहे हैं, जिससे उनके व्यवहार और भावनात्मक संतुलन पर असर पड़ रहा है।

मामले के उदाहरण
डॉक्टर पंत ने दो मामलों का जिक्र करते हुए बताया कि यह समस्या कितनी गंभीर है:

  • एक मामला 11वीं कक्षा के एक छात्र का था, जो सोशल मीडिया पर रील बनाने का आदी हो चुका था। जब उसके माता-पिता ने उसे इंटरनेट देने से मना कर दिया, तो वह घर से भाग गया।
  • एक अन्य मामला 10वीं कक्षा के एक छात्र का था, जो दिनभर मोबाइल पर रील और वीडियो देखता रहता था। जब उसके परिजनों ने उसे टोका, तो उसने स्कूल जाना बंद कर दिया।

समस्या से कैसे बचें
डॉक्टर पंत ने बच्चों को इस समस्या से बचाने के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:

  • बच्चों की स्क्रीन टाइमिंग तय करें।
  • बच्चों को ऑफलाइन गतिविधियों के लिए प्रेरित करें, जैसे शाम को साथ में टहलना, परिवार के साथ बातचीत करना या दोस्तों के साथ मैदान में खेलना।
  • बच्चों को घर के माहौल में जुड़ाव महसूस कराएं, ताकि वे खुद-ब-खुद स्क्रीन से दूरी बनाने लगें।

अतिरिक्त जानकारी

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 5 से 17 वर्ष के बच्चों को प्रतिदिन 2 घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम नहीं देना चाहिए।
  • भारत में 60% से अधिक बच्चे प्रतिदिन 2 घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम देते हैं।
  • मोबाइल की लत से बच्चों में तनाव, चिंता और अवसाद जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं।
  • अभिभावकों को बच्चों के साथ बातचीत करके उनकी समस्याओं को समझने की कोशिश करनी चाहिए।
  • यदि बच्चों में मोबाइल की लत के लक्षण दिखाई दें, तो उन्हें मनोचिकित्सक से परामर्श कराना चाहिए।

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