देहरादून और ऋषिकेश में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बिगड़ने के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ड्रोन से पानी का छिड़काव शुरू किया है, ताकि हवा में धूल और धुंध को कम किया जा सके।
उत्तराखंड में वायु प्रदूषण की समस्या को देखते हुए, देहरादून और ऋषिकेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) ने ड्रोन के माध्यम से पानी का छिड़काव शुरू किया है। यह कदम वायु गुणवत्ता में सुधार लाने और प्रदूषण के स्तर को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
वायु गुणवत्ता की स्थिति
पिछले कुछ दिनों में, देहरादून में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) संतोषजनक श्रेणी से मध्यम श्रेणी में पहुँच गया है। इसी तरह, काशीपुर में भी AQI संतोषजनक से मध्यम श्रेणी में परिवर्तित हुआ है। हरिद्वार, ऋषिकेश और रुद्रपुर में भी वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी गई है।
ड्रोन से पानी का छिड़काव
PCB ने इस स्थिति से निपटने के लिए देहरादून, ऋषिकेश और काशीपुर में ड्रोन से पानी का छिड़काव शुरू किया है। देहरादून में घंटाघर समेत नौ जगहों पर तीन ड्रोन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। ऋषिकेश और काशीपुर में एक-एक ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है।
पिछले साल का प्रयास
पिछले साल, ड्रोन के माध्यम से पानी का छिड़काव केवल देहरादून में किया गया था। इस साल, इस प्रयास को विस्तारित किया गया है और ऋषिकेश और काशीपुर को भी शामिल किया गया है।
PCB का बयान
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि नौ ड्रोनों के माध्यम से 17 स्थानों पर पानी का छिड़काव किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्य आगे भी जारी रहेगा।
वायु प्रदूषण के कारण
वायु प्रदूषण के कई कारण हैं, जिनमें वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्य और कृषि गतिविधियाँ शामिल हैं। दिवाली जैसे त्योहारों के दौरान पटाखों का उपयोग भी वायु प्रदूषण को बढ़ाता है।
वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय
वायु प्रदूषण से बचने के लिए कई उपाय किए जा सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करना या साइकिल चलाना
- ऊर्जा की बचत करना
- पेड़ लगाना
- प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों से बचना
सरकार के प्रयास
सरकार भी वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई प्रयास कर रही है, जिनमें शामिल हैं:
- प्रदूषण नियंत्रण कानून लागू करना
- स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना
- सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाना
वायु प्रदूषण एक गंभीर समस्या है, लेकिन सही प्रयासों से इसे कम किया जा सकता है।
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