उत्तराखंड सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के तहत लिव-इन रिलेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्तावों के अनुसार, 21 साल से कम उम्र के युवाओं के लिव-इन में रहने पर सरकार माता-पिता को जानकारी नहीं देगी।
उत्तराखंड में यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) के तहत सरकार लिव-इन रिलेशन से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नए प्रस्तावों के अनुसार अब अगर 21 साल से कम उम्र का कोई युवा लिव-इन में रह रहा है, तो सरकार यह जानकारी उसके माता-पिता को नहीं देगी। इसके साथ ही लिव-इन पार्टनर के गर्भवती होने या रिश्ता खत्म होने के बाद बच्चे के जन्म की सूचना देने की अनिवार्यता भी खत्म कर दी जाएगी। राज्य सरकार ने इन बदलावों को नागरिकों की “प्राइवेसी और फ्रीडम” से जोड़ते हुए कोर्ट में शपथपत्र दाखिल किया है।
मुख्य बिन्दु:
- लिव-इन में रहने पर माता-पिता को जानकारी नहीं दी जाएगी।
- 21 साल से कम उम्र वालों पर भी गोपनीयता लागू होगी।
- संबंध खत्म होने या गर्भधारण की रिपोर्ट देने की बाध्यता हटेगी।
- पुलिस जांच या निगरानी नहीं होगी।
- विवाह पंजीकरण में सामुदायिक या धार्मिक अनुशंसा जरूरी नहीं रहेगी।
नई नीति के तहत लिव-इन कपल की कोई पुलिस जांच या निगरानी नहीं होगी। कोई भी व्यक्ति बिना ठोस कारण किसी लिव-इन जोड़े की शिकायत भी नहीं कर सकेगा। विवाह पंजीकरण में भी अब धर्म या सामुदायिक प्रमाणपत्र की जरूरत नहीं होगी। यूसीसी में संशोधन का प्रस्ताव हाईकोर्ट में उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2025 में संशोधन के लिए प्रस्ताव नैनीताल हाईकोर्ट में दाखिल किया है। सरकार ने कहा कि नए नियम नागरिकों की निजता की रक्षा करेंगे। शपथपत्र में बताया गया है कि विवाह पंजीकरण और लिव-इन संबंधों से जुड़ी कई शर्तों को हटाया जाएगा, जिससे कोई भी व्यक्ति अपनी इच्छा से संबंध या विवाह का पंजीकरण करा सकेगा।
यूनिफॉर्म सिविल कोड (यूसीसी) क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (Uniform Civil Code – UCC) भारत में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाने का प्रस्ताव है, चाहे वे किसी भी धर्म या जाति के हों। वर्तमान में, विभिन्न धर्मों के अपने-अपने व्यक्तिगत कानून हैं, जो विवाह, तलाक, गोद लेने और विरासत जैसे मामलों को नियंत्रित करते हैं। यूसीसी का उद्देश्य इन व्यक्तिगत कानूनों को समाप्त करना और सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू करना है।
उत्तराखंड सरकार का कदम
उत्तराखंड सरकार द्वारा यूसीसी के तहत लिव-इन संबंधों से जुड़े नियमों में बदलाव का प्रस्ताव एक महत्वपूर्ण कदम है। यह नागरिकों की निजता और स्वतंत्रता को बढ़ावा देने का प्रयास है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी भी बहस जारी है और यह देखना होगा कि यह कानून अंततः किस रूप में लागू होता है।
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